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मूंग -मसूर दाल में ज़हर खा रहे हम,FSSAI ने सौंपी रिपोर्ट

मूंग -मसूर दाल में हम ज़हर खा रहे हैं ऐसी रिपोर्ट दी है FSSAI ने। FSSAI की रिपोर्ट के अनुसार मूंग -मसूर की दालों के सैंपल में बहुत जयादा केमिकल पाया गया है।
मूंग -मसूर दाल में ज़हर खा रहे हम,FSSAI ने सौंपी रिपोर्ट,Daal Image
मूंग -मसूर दाल में ज़हर खा रहे हम,FSSAI ने सौंपी रिपोर्ट
मूंग -मसूर की दाल हमारे यहाँ बहुत जयादा मात्रा में खाई जाती है। ये दाल आपको भारत के हर घर की रसोई में बहुत ही आसानी से मिल जाएगी। एक नार्मल तंदरुस्त इंसान तो इस दाल का सेवन करता ही है वहीँ हॉस्पिटल में जितने भी मरीज होते हैं उन्हें भी ये दाल खाने में दी जाती है। क्योंकि दालों के अंदर बहुत जयादा पोषक तत्व पाए जाते हैं भारत में इस दाल को बहुत जयादा इस्तेमाल किया जाता है इसलिए ही मूंग -मसूर की दाल को विदेशों से बड़े लेवल पर इम्पोर्ट किया जाता है लेकिन अब FSSAI की रिपोर्ट के बाद आप इस दाल को खाने से पहले सोचेंगे जरूर,क्योंकि दाल के साथ हम ज़हरीले केमिकल भी खा रहे हैं जो हमारे शरीर को और हमारी किडनी को नुकसान पहुंचाते हैं।इन दालों के अंदर जो केमिकल पाए गए हैं उन केमिकल को खेतों में घास नष्ट करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है और इनका ज्यादा सेवन इंसान के इम्यून सिस्टम पर असर करता है।

FSSAI (फ़ूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड ऑथोरिटी ऑफ़ इंडिया) के अनुसार दालों में केमिकल की  मात्रा होने की संभावना आंकी गयी है यहाँ पर एक और अहम् पहलू है की FSSAI ने कोई भी गाइडलाइन्स क्लियर नहीं की है दालों को लेकर वैसे FSSAI ने कुछ स्टैंडर्ड पालन करने के लिए कहा है जो कोडेक्स स्टैंडर्ड में है।

दाल सैंपल - वैसे तो ये जानकारी तब सामने आयी जब कनाडा फ़ूड इंस्पेक्शन एजेंसी (CFIA) ने दालों के कुछ सैंपल की जाँच की। और सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद सामने आया के ऑस्ट्रेलिया के दाल सैंपल और कनाडा के दाल सैंपल में केमिकल की मात्रा पायी गयी है। मात्रा की बात करें तो ऑस्ट्रेलिया की दाल के सैंपल में प्रति अरब 1000 पार्ट्स और कनाडा की दाल सैंपल में प्रति अरब 282 पार्ट्स ग्लाइफास्फेट के पाए गए हैं। जो बहुत जयादा हैं।

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भारत में ज़्यादातर ये दालें कनाडा और ऑस्ट्रेलिया से ही इम्पोर्ट होती हैं। FSSAI ने ये दालें जयादा ना इस्तेमाल करने की सलाह दी है क्योंकि इन दालों के फाइनल सैंपल में केमिकल की बहुत जयादा मात्रा पाई गयी है। जिनमे ग्लाइफास्फेट और हर्बिसाइट्स पाया गया है। ये केमिकल कृषि में घास को नष्ट करने के लिए यूज़ किये जाते हैं। आप इस से अनुमान लगा सकते हैं ये केमिकल कितने ख़तरनाक होंगे इंसान के शरीर के लिए।

Indian Standard Quality

WHO (वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन) ने काफी समय पहले ही इन केमिकल को इस्तेमाल करने के लिए साफ़ मना किया है क्योंकि इसका कारण ये था के पहले हर्बिसाइट्स और ग्लाइफास्फेट को सुरक्षा की दृष्टि से सही आंका जाता था। वहीँ भारत में दालों के लिए कोई स्टैंडर्ड क़्वालिटी प्रोसेस नहीं है इसलिए भारत में इनका कोई टेस्ट नहीं किया जाता।

आप भी अपनी व्यस्त जिंदगी में थोड़ा समय जरूर निकालें और अपनी  खाने पिने की चीजों को जरूर चेक करें
जितना हो सके आप आर्गेनिक फ़ूड को इस्तेमाल करें विदेशों में भी अब आर्गेनिक फ़ूड की बहुत डिमांड बढ़ने लगी है और हमारे इंडिया में भी आर्गेनिक फ़ूड की मांग बहुत बढ़ रही है जो की हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत जरुरी है अगर हम सब आर्गेनिक फ़ूड की  मांग करेंगे तो किसान भी आर्गेनिक तरीके से ही फ़सल तेयार करेंगे। आर्गेनिक तरीके से तेयार फ़सल में केमिकल भी नहीं होते और पर्यावरण भी शुद्ध रहता है। जिसका हमारे शरीर और जिंदगी पर सीधा असर होता है और हम स्वास्थ्य रह पाएंगे।
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